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GOVERNANCE

संसद का कार्य: प्रमुख विधेयकों पर बहस, सांसदों का निलंबन और अध्यक्ष की भूमिका

December 02, 2025 04:16 PM
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संसद का कार्य: प्रमुख विधेयकों पर बहस, सांसदों का निलंबन और अध्यक्ष की भूमिका
संसद का कार्य: विशेष रिपोर्ट
सोशल जस्टिस डेस्क

भारतीय संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च विधायी संस्था है। यह केवल कानून बनाने का कारखाना नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। इस विशेष रिपोर्ट में हम संसद की कार्यप्रणाली, 2025 के प्रमुख विधेयकों और संसदीय गतिरोध के कारणों का विश्लेषण करेंगे।

संसद भवन

संसद के मुख्य कार्य

विधायी कार्य

संघ और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाना संसद का प्राथमिक दायित्व है।

वित्तीय नियंत्रण

बजट पारित करना और सरकार के खर्चों पर निगरानी रखना (PAC के माध्यम से)।

जवाबदेही

प्रश्नकाल और अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से कार्यपालिका को संसद के प्रति उत्तरदायी बनाना।

विधेयक पारित करने की प्रक्रिया

एक विधेयक को कानून बनने के लिए एक जटिल और विस्तृत प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है:

  1. प्रथम वाचन (प्रस्तुतीकरण)
    विधेयक को सदन में पेश किया जाता है और राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।
  2. द्वितीय वाचन (विचार-विमर्श)
    सबसे महत्वपूर्ण चरण। विधेयक की प्रत्येक धारा पर चर्चा होती है। इसे समिति को भी भेजा जा सकता है।
  3. तृतीय वाचन (मतदान)
    विधेयक पर अंतिम मतदान होता है। यदि बहुमत पक्ष में हो, तो इसे पारित माना जाता है।
  4. राष्ट्रपति की स्वीकृति
    दोनों सदनों से पारित होने के बाद, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से विधेयक 'अधिनियम' बन जाता है।

2025 के प्रमुख विधेयक और डेटा

वर्ष 2025 संसदीय गतिविधियों के लिए अत्यंत सक्रिय रहा। नीचे दिए गए चार्ट में सत्र-वार पारित विधेयकों की संख्या दर्शाई गई है:

मानसून सत्र 2025
  • आयकर (संख्या 2) विधेयक, 2025
  • भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025
  • खनन और खनिज संशोधन विधेयक
  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक
बजट सत्र 2025

बजट सत्र में कुल 16 विधेयक पारित हुए, जिसमें वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक प्रमुख थे।

लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष

संवैधानिक स्थिति: लोकसभा अध्यक्ष केवल एक पीठासीन अधिकारी नहीं, बल्कि सदन की गरिमा और विशेषाधिकारों का संरक्षक है। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, "अध्यक्ष सदन का प्रतिनिधित्व करता है, और सदन राष्ट्र का।"

प्रमुख शक्तियां:

  • धन विधेयक का निर्णय: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अध्यक्ष का होता है (अनुच्छेद 110)।
  • दल-बदल विरोधी कानून: 10वीं अनुसूची के तहत सदस्यों की अयोग्यता का फैसला अध्यक्ष करते हैं।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई: सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए सदस्यों को चेतावनी देना या निलंबित करना।

सांसदों का निलंबन: नियम और विवाद

हाल के वर्षों में निलंबन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसके लिए संसद की नियमावली में स्पष्ट प्रावधान हैं:

सदन नियम प्रावधान
लोकसभा नियम 374 अध्यक्ष किसी सदस्य को 'नेम' (Name) कर सकते हैं, जिसके बाद प्रस्ताव पारित कर उसे सत्र के लिए निलंबित किया जाता है।
नियम 374A घोर अव्यवस्था (जैसे वेल में आना) पर स्वतः निलंबन का प्रावधान (5 बैठकें या शेष सत्र)।
राज्यसभा नियम 255 & 256 सभापति सदस्य को बाहर जाने का निर्देश दे सकते हैं (255) या सदन प्रस्ताव पारित कर निलंबित कर सकता है (256)।

निलंबन का प्रभाव

यद्यपि अनुशासन के लिए निलंबन आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग विपक्ष की आवाज को कमजोर करता है। निलंबित सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं को सदन में नहीं उठा पाते, जो अंततः प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को प्रभावित करता है।

निष्कर्ष और आगे की राह

भारतीय संसद एक जीवंत संस्था है। यद्यपि व्यवधान और निलंबन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सुधार की गुंजाइश भी उतनी ही है। संसदीय समितियों को और अधिक सशक्त बनाकर और सदन में बहस के लिए अधिक समय आवंटित कर हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत बना सकते हैं।

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